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नदियों की भूमि और विकसित भारत का सपना

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सर्बानंद सोनोवाल

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जनवरी 2023 में वाराणसी से डिब्रूगढ़ तक चलने वाली दुनिया की सबसे लंबी नदी यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जो एक ऐतिहासिक क्षण था। इस 51 दिवसीय क्रूज ने 27 विभिन्न नदी प्रणालियों में 3,200 किमी तक की यात्रा बिना किसी बाधा के तय की। इस दौरान क्रूज में सवार पर्यटकों को रास्ते में आने वाले 50 पर्यटन स्थलों पर हमारी विरासत, संस्कृति और शहरी परिदृश्य का अनुभव करने का मौका मिला। पिछले दशक में भारत ने परिवहन प्रणाली के प्रति अपने दृष्टिकोण में ऐसे कई परिवर्तनकारी बदलाव देखे हैं और इस विकास के केंद्र में हमारे पारंपरिक जलमार्ग नेटवर्क का पुनरुद्धार शामिल है।

भारत, नदियों की भूमि

सरकार के सुधार-केंद्रित दृष्टिकोण के तहत अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन (आईडब्ल्यूटी) प्रणाली को पर्यावरण-अनुकूल और लागत प्रभावी परिवहन मोड के रूप में विकसित करना है। एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सरकार ने राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम 2016 लागू किया, जिसने वैज्ञानिक अध्ययन, विकास और संचालन के लिए परिवहन के 20,000 किमी से अधिक तक फैले 111 जलमार्गों की पहचान की।

इसके बाद, सागरमाला राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना शुरू की गई, जिसमें जलमार्ग परिवहन के लिए कार्गो-विशिष्ट अवसरों की पहचान की गई, जिसके बाद अंतर्देशीय जहाज अधिनियम 2021 लागू हुआ, जिसने 1917 के शताब्दी पुराने कानून को बदल दिया। इन नीति सुधारों ने निवेश की एक नई लहर को जन्म दिया, साथ ही व्यापार करने में आसानी हुई और आर्थिक विकास को गति मिली।

नया IV अधिनियम इस क्षेत्र के पूर्ण डिजिटलीकरण के मार्ग को प्रशस्त करता है, राज्यों में इसे जुड़े नियमों को सुसंगत बनाता है, नेविगेशन सुरक्षा और कार्गो सुरक्षा मानकों को बढ़ाता है, प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ाता है और अंतर्देशीय एवं तटीय जलमार्गों के एकीकृत विकास की सुविधा प्रदान

विशाल सामाजिक-आर्थिक क्षमता को पहचानते हुए सरकार ने एनडब्ल्यू के विकास के लिए निवेश किए गए धन में भी 247 प्रतिशत की वृद्धि की है। इसके तहत 1986 से 2014 के बीच एनडब्ल्यू पर 1,517 करोड़ रुपये खर्च किये गये थे, जो 2014 और 2023 में बढ़कर 5,200 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इससे 51,000 से अधिक नए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं

करता है। विभिन्न हितधारकों के बीच कार्गो और बुनियादी ढांचे से संबंधित जानकारी को निर्बाध रूप से साझा करने की अनुमति देने के लिए कार्गो डेटा पोर्टल (सीएआर-डी) और एसेट एंड नेविगेशन इंफॉर्मेशन (पैनी) पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भी बनाए गए हैं, जिससे अधिक डेटा-संचालित निर्णय लेने में मदद मिलती है।

इन सुधारों का प्रभाव राष्ट्रीय जलमार्ग कार्गो में छह गुना की वृद्धि में दिखता है, जो 2014 में 18.07 एमटीपीए से बढ़कर 2023 में 108.88 एमटीपीए हो गया है। यह सरकार की ‘सुधार-प्रदर्शन-परिवर्तन’ दृष्टि का एक उदाहरण है।

निवेश, कौशल विकास एवं रोजगार

प्रधानमंत्री ने एनडब्ल्यू-1 (गंगा-भागीरथी-हुगली नदी प्रणाली) और एनडब्ल्यू -2 (ब्रह्मपुत्र नदी) के साथ पूर्ण कायाकल्प, बुनियादी ढांचे के विकास और आजीविका सृजन के लिए ‘अर्थ गंगा’ और ‘महाबाहु-ब्रह्मपुत्र’ समग्र दृष्टिकोण दिया। संपूर्ण सरकार के दृष्टिकोण और शासन के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ मॉडल के साथ, भारत के ‘जल राजमार्ग’ तेजी से आर्थिक विकास और सामाजिक समावेशन की रीढ़ बन गए हैं।

मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 में आईडब्ल्यूटी कार्गो हिस्सेदारी को 5 प्रतिशत तक बढ़ाने, 200 एमटीपीए की स्तर को पार करने और 2030 तक 700 मिलियन से अधिक यात्रियों को समायोजित करने की परिकल्पना की गई है। विशाल सामाजिक-आर्थिक क्षमता को पहचानते हुए सरकार ने एनडब्ल्यू के विकास के लिए निवेश किए गए धन में भी 247 प्रतिशत की वृद्धि की है। इसके तहत 1986 से 2014 के बीच एनडब्ल्यू पर 1,517 करोड़ रुपये खर्च किये गये थे, जो 2014 और 2023 में बढ़कर 5,200 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इससे 51,000 से अधिक नए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।

हमने चरणबद्ध विकास के लिए 26 संभावित उच्च-यातायात राष्ट्रीय जलमार्गों को प्राथमिकता दी है। एनडब्ल्यू-1 और एनडब्ल्यू-2 की कुछ प्रमुख परियोजनाओं में वाराणसी, साहिबगंज और हल्दिया में मल्टी-मॉडल टर्मिनल, फरक्का में एक नेविगेशनल लॉक और जोगीघोपा, बोगीबील और डिब्रूगढ़ में यात्री-सह-कार्गो घाट शामिल हैं। कलिंगनगर, तालचेर और ओडिशा के अन्य औद्योगिक समूहों को एनडब्ल्यू-64 (महानदी नदी) और एनडब्ल्यू-5 के माध्यम से पारादीप और धामरा बंदरगाहों से जोड़ने के लिए 22,000 करोड़ रुपये की मेगा जलमार्ग कनेक्टिविटी परियोजना भी विकसित की जा रही है। महाराष्ट्र में एनडब्ल्यू-10 (अम्बा नदी) और एनडब्ल्यू-28 (दाभोल क्रीक-वशिष्ठी नदी) पर इसी तरह के विकास कार्यों को प्राथमिकता दी गई है।

अष्ट लक्ष्मी, भारत का नया विकास इंजन

प्रधानमंत्री के दूरदर्शी और गतिशील नेतृत्व में भारत के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में पिछले दशक में परिवर्तनकारी विकास हुआ है और यह 21वीं सदी में भारत का नया विकास इंजन बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस क्षेत्र को अग्रणी स्थिति में लाने के लिए समग्र योजना और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 2016 में उत्तर पूर्वी क्षेत्र की 20 नदियों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया था। पांडु बंदरगाह पर पूर्वोत्तर की पहली जहाज मरम्मत सुविधा के निर्माण सहित निर्बाध सड़क और रेल कनेक्टिविटी और अन्य आवश्यक रसद बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए भी महत्वपूर्ण निवेश किया जा रहा है। इससे ब्रह्मपुत्र नदी पर चलने वाले अंतर्देशीय जहाजों की मरम्मत का समय और लागत बहुत कम हो जाएगी।

इसके अलावा, युवा शक्ति की क्षमता का उपयोग करने के लिए 2023 में दो संस्थान स्थापित किए गए हैं– जिसमें गुवाहाटी में पूर्वोत्तर के लिए समुद्री कौशल केंद्र और अगरतला में रसद, जलमार्ग और संचार स्कूल शामिल है। ये संस्थान विशाल प्रतिभा पूल का उपयोग करेंगे और भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को अनुसंधान, शिक्षा और प्रशिक्षण का अग्रणी केंद्र बनाएंगे।

सरकार पूर्वी जलमार्ग कनेक्टिविटी ट्रांसपोर्ट ग्रिड बना रही है, जिसके तहत 5,000 किलोमीटर के नौगम्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जलमार्गों का एक नेटवर्क विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। हम कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट के संचालन में भी तेजी से प्रगति कर रहे हैं, जो भारत के पूर्वी तट से म्यांमार के सिटवे पोर्ट के माध्यम से उत्तर-पूर्वी राज्यों तक वैकल्पिक कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जिसका उद्घाटन मैंने इस साल मई में किया था। ये विकास आसियान और बिम्सटेक देशों के साथ भारत के पूर्वोत्तर के एकीकरण को बढ़ाएंगे, क्षेत्रीय विकास को गति देंगे, लोगों के बीच परस्पर संपर्क बढ़ाएंगे और गहरे व्यापार संबंध बनाएंगे।

भारत की विशाल समुद्री क्षमता को प्रदर्शित करने के लिए मंत्रालय ‘कनेक्ट— सहयोग— निर्माण’ विषय के तहत 17 से 19 अक्टूबर तक मुंबई में तीसरे वैश्विक समुद्री भारत शिखर सम्मेलन 2023 की मेजबानी कर रहा है। यह संस्करण उभरती समुद्री प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श करने और भारत के जहाज निर्माण, बंदरगाहों, अंतर्देशीय और तटीय जल परिवहन, समुद्री स्टार्ट-अप और अन्य क्षेत्रों में निवेश के अवसरों का पता लगाने के लिए 70 से अधिक देशों के सरकारी तंत्र और व्यापारिक नेतृत्वकर्ताओं और 3,000 से अधिक प्रतिष्ठित प्रतिनिधियों को एक साथ ला रहा है। भारत विकसित भारत के लक्ष्य की ओर पूरी ताकत से आगे बढ़ रहा है।

(लेखक भारत सरकार में बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय और आयुष मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री हैं)

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