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नारी उत्थान के क्षेत्र में लिया गया ऐतिहासिक निर्णय

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राजकुमार चाहर

केवल नारी उत्थान नहीं, नारी के नेतृत्व में विकास की दृष्टि बीते चंद वर्षों में राष्ट्र की नीति बनी है। इसी नीति को अब वैश्विक एजेंडा बनाने के साथ ही भारत का नए संसद भवन में प्रवेश, भारत की नारी शक्ति के लिए विशेष अवसर बना। दशकों से लंबित विधायिका में महिला आरक्षण के सपने को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प ने यथार्थ में बदला, तो आम सहमति के नाम पर लटकने वाला बिल संसद के विशेष सत्र में केंद्र सरकार के साहसिक निर्णय, दृढ़ निश्चय और ईमानदार पहल से सहजता से कानून बन गया। अब लोकसभा-विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का मार्ग प्रशस्त हुआ।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में रखे गए प्रावधान
(संविधान का 128वां संशोधन अधिनियम, 2023)

• इस बिल के माध्यम से आर्टिकल 339एए, 330ए, 332ए और 334ए में संशोधन किए गए।
• 339एए के माध्यम से 33 फीसदी सीटें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
• 330ए के माध्यम से लोकसभा में प्रत्यक्ष निर्वाचन से भरी जाने वाली एक तिहाई सीटें (एससी और एसटी से संबंधित महिलाओं के लिए आरक्षित सीट सहित) महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
• 332ए के माध्यम से प्रत्येक राज्य की विधानसभा में महिलाओं के लिए स्थान आरक्षित होंगे। अनुच्छेद के खंड-3 में एससी और एसटी सहित एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी।
• 334ए में नया प्रावधान जोड़ा गया है, जिसके तहत महिला आरक्षण की अवधि 15 साल के लिए होगी। भविष्य में जरूरत महसूस होने पर संसद को आरक्षण की अवधि बढ़ाने का अधिकार होगा।
• लोकसभा में अभी सीटों की संख्या 543 है। जैसे ही कानून लागू होगा, महिला सदस्यों की संख्या 181 हो जाएगी जो वर्तमान में 82 है।

नए भारत की नई संसद में 20-21 सितंबर, नारी शक्ति के लिए ऐतिहासिक बन गया है। कभी राजनीति और सत्ता को सर्वोपरि मानकर जिस बिल को दशकों तक लटकाया गया या यूं कहें कि केवल बातें हुईं, उसे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने यथार्थ बना दिया। इसके लिए उन्होंने अवसर भी विशेष बना दिया और संसद के नए भवन में प्रवेश के लिए विशेष प्रयोजन के साथ विशेष सत्र बुलाया। अब जब भी नए संसद भवन की पहली शुरुआत की बात होगी, हर भारतवासी और विशेष रूप से नारी शक्ति का माथा गौरव से ऊंचा होगा।

दरअसल, नई संसद में राष्ट्र ने एक ऐसा इतिहास बनते देखा है, जिसकी कल्पना तो थी, लेकिन यथार्थ में बदलने की उम्मीद नहीं दिख रही थी। नई संसद ने नया इतिहास रचा और यह अवसर नारी शक्ति के वंदन का अप्रतिम उदाहरण बन गया। आने वाली अनेक पीढ़ियों तक इस निर्णय और दिवस की चर्चा होगी। संसद के दोनों सदनों द्वारा नारी शक्ति वंदन अधिनियम को रिकॉर्ड मतों से पारित किया जा चुका है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद 29 सितंबर को कानून बन चुका है। जिस बात का देश को पिछले कई दशकों से इंतजार था, वो सपना अब सच हुआ है। लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण अब सिद्धि बन गई है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम कोई सामान्य कानून नहीं है। यह नए भारत की नई लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता का उद्घोष है। यह अमृतकाल में ‘सबका प्रयास’ से विकसित भारत के निर्माण की तरफ बहुत बड़़ा और बहुत मजबूत कदम है। महिलाओं का जीवन स्तर सुधारने के लिए, क्वालिटी ऑफ लाइफ बेहतर करने के लिए, नारी के नेतृत्व में विकास का नया युग देश में लाने की जो गारंटी है, यह प्रधानमंत्री मोदीजी के संकल्प का प्रत्यक्ष प्रमाण है। लगभग तीन दशक से इस बिल को पारित कराने के लिए प्रयास हो रहा था। महिला आरक्षण सुनिश्चित कराने वाले इस कानून की राह में तरह-तरह की बाधाएं थीं, दशकों पुराने अड़ंगे थे, लेकिन जब नीयत पवित्र होती है, प्रयासों में पारदर्शशिता होती है, तो परेशानियों को पार करके भी परिणाम लाती है। यह भी अपने आप में एक रिकॉर्ड है कि इस कानून को सदन में इतना व्यापक समर्थन मिला। नए संसद भवन में पक्ष-विपक्ष की सीमाओं से ऊपर उठकर करीब-करीब सबने इसके पक्ष में वोट किया। अमृत काल की ओर बढ़ते भारत में नारी शक्ति, नीति, निष्ठा, निर्णय शक्ति और नेतृत्व का प्रतिबिंब बनी है क्योंकि वेदों और भारतीय परंपरा ने भी यही आह्वान किया है कि नारियां सक्षम हों, समर्थ हों और राष्ट्र को दिशा दें। अपने इसी दृष्टिकोण के साथ भारत ने जी-20 की अध्यक्षता करते हुए नारी शक्ति के नेतृत्व को अपनी प्राथमिकता में रख विश्व समाज को एक नई दिशा दी, तो अब नए संसद भवन में महिला आरक्षण बिल के रूप में पहला काम करके इतिहास रच दिया है।

असंभव को संभव कराती स्थिरता

महिला आरक्षण के लिए तीन दशकों से कोशिश और बातें हो रही थी, लेकिन अब यह संभव हुआ है। इससे पहले चार बार यह बिल संसद में लाया गया, लेकिन कभी पारित नहीं हुआ। इसे आम सहमति के नाम पर लटकाया गया। ऐसे में प्रश्न स्वाभाविक है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक ही प्रयास में कैसे आम सहमति से इस बिल को पारित करा लिया। आखिर पहले ऐसा क्यों नहीं हुआ? इसकी एकमात्र वजह है— स्थिरता। केंद्र में आज पूर्ण बहुमत वाली मजबूत सरकार है, जिसकी पहचान है— साहसिक निर्णय लेना और उसे लागू करवाना। दोनों सदनों में इसका पास होना इस बात का साक्षी है कि पूर्ण बहुमत वाली स्थिर सरकार होती है, तो देश कैसे बड़े फैसले लेता है, कैसे पड़़ावों को पार करता है। यही कारण है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक सच्चाई बन गया है। इस कानून ने फिर साबित किया है कि देश को आगे ले जाने के लिए, पूर्ण बहुमत वाली सरकार, मजबूत सरकार, निर्णायक सरकार एक आवश्यकता है। कभी बिल फाड़ दिया जाता था, लेकिन आज सभी ने समर्थन किया, तो उसकी वजह है पिछले 10 वर्षों में महिला एक शक्ति बनकर उभरी हैं।

ताकि सक्षम रहे महिला शक्ति

• कोविड काल में महिलाओं को विशेष सहायता दी गई।
• अप्रैल-जून 2020 के दौरान 20 करोड़ महिलाओं के खाते में 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि हस्तांतरित की गई।
• पीएम गरीब कल्याण योजना के तहत 14 करोड़ रिफिल सिलेंडर मुफ्त दिए गए।
• भारत में करीब 1.2 करोड़ स्वयं सहायता समूह हैं जिनमें 88 फीसदी पूर्णत: महिला स्वयं सहायता समूह हैं। इनमें 9 करोड़ महिलाएं जुड़ी हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए गारंटी मुक्त ऋण देने की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये तक की गई।
• देश में 10 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को उज्ज्वला के तहत रसोई गैस के कनेक्शन दिए गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े बताते हैं कि पारंपरिक ईंधन-लकड़ी, कोयला आदि से खाना पकाने से भारत में सालाना 5 लाख मौतें होती थी। लेकिन केंद्र सरकार के इस प्रयास से महिलाओं में सांस संबंधी बीमारी के मामलों में 20 फीसदी की कमी आई है।

मातृशक्ति का सम्मान

‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ भारत के विकास में नारी शक्ति की भूमिका को निर्धारित करेगा। वर्ष 2047 तक के अमृत काल में विकसित भारत के निर्माण में मील का पत्थर सिद्ध होगा। महिला सशक्तीकरण को नई दिशा देने वाला होगा। नए भारत के निर्माण में ऐतिहासिक महिला नेतृत्व को पहचान दिलाने वाला होगा, संपूर्ण विश्व के लिए प्रेरणा देने वाला सिद्ध होगा। यह 140 करोड़ की आबादी में 50 प्रतिशत भागीदारी रखने वाली मातृ शक्ति का सच्चे अर्थ में सम्मान है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नारी के नेतृत्व में विकास की बात समग्र विश्व के सामने रखी। जी-20 की अध्यक्षता करते हुए भारत ने दुनिया को यह अहसास कराया कि मातृशक्ति, बेटियां न केवल नीतियों में सहभागिता कर सकती हैं, बल्कि नीति-निर्धारण में अपने पद को भी सुरक्षित कर पाने में सक्षम हैं। इसकी वजह है कि वर्तमान केंद्र सरकार के लिए महिला सशक्तीकरण राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक संकल्प है। इसका एक उदाहरण यह भी है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने वेतन के रूप में मिली सारी राशि को गुजरात सचिवालय के कर्मचारियों की बच्चियों की पढ़ाई के लिए दे दिया था। इतना ही नहीं, उन्हें जितनी भेंट मिली थी, उसकी नीलामी से मिलने वाली राशि भी बच्चियों की पढ़ाई के लिए दान दी थी। कल्पना कीजिए कि आप 140 करोड़ देशवासियों के चुने नेता हैं, जिनके सोशल मीडिया पर बड़े प्रशंसक समूह हैं और प्रधानमंत्री मोदीजी ने अपना सोशल मीडिया अकाउंट पूरी तरह से 7 महिलाओं को पूरे दिन के लिए सौंप दिया था। कैसी अनुभूति होगी आपको। जी हां, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2019 में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अपना ट्विटर अकाउंट 7 महिलाओं को सौंप दिया था।

कथनी और करनी में साम्यता का यह अद्भुत उदाहरण ही दरअसल नए भारत के केंद्र में नारी शक्ति को समान अधिकार और अवसर दे रहा है, जहां महिलाएं भी सुरक्षा और सम्मान के साथ सशक्तीकरण की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। इतना ही नहीं, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में 2014 के बाद से तकनीकी शिक्षा में महिलाओं की संख्या दोगुनी हो गई है। भारत में लगभग 43 प्रतिशत एसटीईएम यानी विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित स्नातक महिलाएं हैं। भारत में लगभग एक-चौथाई अंतरिक्ष वैज्ञानिक महिलाएं हैं। चंद्रयान, गगनयान और मिशन मंगल जैसे प्रमुख कार्यक्रमों की सफलता के पीछे महिला वैज्ञानिकों की प्रतिभा और कड़़ी मेहनत है। आज भारत में उच्च शिक्षा में पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक संख्या में प्रवेश ले रही हैं। नागरिक उड्डयन क्षेत्र में महिला पायलटों के मामले में उच्चतम प्रतिशत वाले देश में शामिल हैं। साथ ही भारतीय वायुसेना में महिला पायलट अब लड़़ाकू विमान उड़़ा रही हैं। सभी सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों को ऑपरेशनल भूमिकाओं और लड़़ाकू मोर्चो पर तैनात किया जा रहा है।

संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पारित होने के साथ, हम भारत की महिलाओं के लिए मजबूत प्रतिनिधित्व और सशक्तीकरण के युग की शुरुआत करते हैं। यह महज एक कानून नहीं है; यह उन अनगिनत महिलाओं का सम्मान है, जिन्होंने देश को आगे बढ़़ाया है। भारत को सुदृढ़ और समृद्ध बनाने में अपना योगदान दिया है। एक बार पुनः मे इस एेतिहासिक कार्य के लिए मोदी जी को धन्यवाद ज्ञापित करता हूं।

(लेखक भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं)

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